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जर्मनी 2038 या 2042 में विश्व कप की मेज़बानी के लिए तैयार
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जर्मनी 2038 या 2042 में विश्व कप की मेज़बानी के लिए तैयार

जर्मनी विश्व कप 2038 या 2042 की मेज़बानी के लिए अपनी तैयारियों को तेज कर रहा है, जबकि FIFA की टिकट मूल्य नीति पर चिंता भी व्यक्त कर रहा है।

30 जुलाई 2026✍️ Mariano Bravo
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जर्मनी 2038 या 2042 में विश्व कप की मेज़बानी के लिए तैयार

News के अनुसार।

पृष्ठभूमि

जर्मनी की फुटबॉल संघ (DFB) और बुंडेसलीगा क्लब आइंट्राच्ट फ्रैंकफर्ट के सीईओ एक्सल हेल्मन ने जर्मनी की मेज़बानी की संभावनाओं पर जोर दिया है। जर्मनी के पास विश्व कप की मेज़बानी के लिए आवश्यक सभी बुनियादी ढाँचा है, जो इसे एक मजबूत दावेदार बनाता है।

यह क्यों मायने रखता है

जर्मनी की विश्व कप 2038 या 2042 की मेज़बानी की संभावनाएँ देश के फुटबॉल के लिए महत्वपूर्ण हैं। जर्मनी, जो पहले भी विश्व कप की मेज़बानी कर चुका है, अपनी बुनियादी ढाँचा और फुटबॉल संस्कृति के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, FIFA द्वारा निर्धारित टिकट मूल्य नीति पर चिंता दर्शाती है कि भविष्य में दर्शकों की भागीदारी कैसे प्रभावित हो सकती है।

मुख्य बातें

  • जर्मनी 2038 या 2042 में विश्व कप की मेज़बानी के लिए तैयार.
  • जर्मनी विश्व कप 2038 या 2042 की मेज़बानी के लिए अपनी तैयारियों को तेज कर रहा है, जबकि FIFA की टिकट मूल्य नीति पर चिंता भी व्यक्त कर रहा है।.
  • Germany wants to host World Cup in 2038 or 2042 - The Athletic.

जर्मनी फुटबॉल संघ (DFB) के प्रमुख कार्यकारी, एक्सल हेल्मन, ने कहा है कि उनका देश 2038 या 2042 में पुरुष विश्व कप की मेज़बानी के लिए एक प्रमुख दावेदार है। हेल्मन, जो बुंडेसलीगा क्लब आइंट्राच्ट फ्रैंकफर्ट के सीईओ भी हैं, ने बताया कि जर्मनी के पास आवश्यक सभी बुनियादी ढाँचा है। उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि इस गर्मी में FIFA द्वारा निर्धारित रिकॉर्ड-उच्च टिकट की कीमतें भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए एक खतरनाक उदाहरण सेट कर सकती हैं।

बेरंड न्यूएंडॉर्फ, DFB के अध्यक्ष, ने पहले सुझाव दिया था कि उनकी संस्था भविष्य में एक बोली पर विचार करेगी। हेल्मन ने कहा, "हम निश्चित रूप से इस पर विचार करेंगे, और न्यूएंडॉर्फ और DFB की एक पहल 2042 के लिए बोली लगाने के लिए है, शायद 2038 भी। यह FIFA के नियमों पर निर्भर करेगा।"

हालांकि, 2038 के लिए जर्मनी की बोली की एक चुनौती FIFA के परिसंघ रोटेशन सिद्धांत है। इसके अनुसार, एक परिसंघ को दूसरे विश्व कप की मेज़बानी के लिए दो प्रतियोगिताओं का इंतजार करना पड़ता है। 2030 का टूर्नामेंट तीन महाद्वीपों (अफ्रीका, यूरोप और दक्षिण अमेरिका) और छह देशों (मोरोको, स्पेन, पुर्तगाल, उरुग्वे, अर्जेंटीना और पैराग्वे) के बीच साझा किया जाएगा। इससे 2034 का टूर्नामेंट सऊदी अरब के लिए लगभग निश्चित हो गया है, जो एशियाई परिसंघ का हिस्सा है। इस रोटेशन सिद्धांत के तहत, केवल उत्तरी अमेरिका और ओशिनिया 2038 के लिए विकल्प रह जाते हैं।

हेल्मन ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि FIFA को इस नियम में बदलाव की आवश्यकता होगी, लेकिन उन्होंने सुझाव दिया कि FIFA ने पहले भी अनौपचारिक नीतिगत निर्णय लेने में लचीलापन दिखाया है। उन्होंने कहा, "जर्मनी में स्टेडियम, परिवहन और होटल की बुनियादी ढाँचा है। हर एक मैच में दर्शक भरे होंगे। यह एक सफलता होगी। 2038 के लिए (एक बोली) की जगह है, लेकिन मुझे यकीन है कि 2042 के लिए हमारे पास एक सफल अभियान चलाने के अच्छे मौके हैं।"

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जर्मनी के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि हेल्मन ने कहा कि DFB के अध्यक्ष न्यूएंडॉर्फ की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जर्मनी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि समाज को एक संकेत भेजा जाए कि देश उत्साही है।

हेल्मन ने यह भी कहा कि उन्होंने 2026 के विश्व कप की प्रशंसा की, जिसमें अमेरिका को कनाडा और मेक्सिको के साथ शामिल होना सही लगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका में विश्व कप को लेकर जो उत्साह देखा गया, वह प्रभावित करने वाला था। हालांकि, उन्होंने कहा कि FIFA की टिकट की कीमतें "हमारे क्लब (फ्रैंकफर्ट) के साथ पालन किए जाने वाले सिद्धांत के खिलाफ हैं।" उन्होंने कहा, "सामाजिक बाधाएँ मैचों से लोगों को दूर रखने का काम नहीं करना चाहिए।"

हेल्मन ने कहा कि फुटबॉल लोगों का खेल है और इसे एक हद तक लोगों के लिए होना चाहिए। यदि हम युवा बच्चों को फुटबॉल से जोड़ना चाहते हैं, तो उन्हें लाइव मैच का अनुभव देना महत्वपूर्ण है। यह एक अनुभव होना चाहिए, जिसमें सभी शामिल हों।

हेल्मन ने FIFA की टिकटों की उच्च कीमतों पर चिंता जताते हुए कहा, "उनके वित्तीय हित एक भूमिका निभाते हैं। यह एक तरीका है कुछ समूहों को फुटबॉल से दूर रखने का।" उन्होंने कहा कि जर्मनी में सुरक्षित खड़े रहने का अनुभव है, जिससे सस्ती कीमतें सभी के लिए उपलब्ध हो सकती हैं।

इन सभी बातों के बीच, यह स्पष्ट है कि जर्मनी 2038 या 2042 में विश्व कप की मेज़बानी के लिए गंभीरता से विचार कर रहा है और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा और अनुभव भी उसके पास है। जर्मनी की यह तैयारी न केवल फुटबॉल के लिए बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

आगे क्या होगा

जर्मनी की बोली की प्रक्रिया FIFA के नियमों पर निर्भर करेगी, विशेष रूप से परिसंघ रोटेशन सिद्धांत पर। यदि जर्मनी 2038 के लिए बोली लगाता है, तो उसे अन्य परिसंघों की मेज़बानी के समय का इंतजार करना पड़ सकता है। DFB और हेल्मन की टीम इस दिशा में आगे बढ़ने की योजना बना रही है, लेकिन अंतिम निर्णय FIFA की नीतियों पर निर्भर करेगा।

Frequently Asked Questions

जर्मनी ने कब विश्व कप की मेज़बानी के लिए दावेदारी की है?

जर्मनी ने 2038 या 2042 में पुरुष विश्व कप की मेज़बानी के लिए दावेदारी की है।

किसने जर्मनी की विश्व कप मेज़बानी की पुष्टि की है?

जर्मनी फुटबॉल संघ (DFB) के प्रमुख कार्यकारी, एक्सल हेल्मन ने इसकी पुष्टि की है।

जर्मनी की मेज़बानी की दावेदारी के पीछे का कारण क्या है?

जर्मनी के पास आवश्यक सभी बुनियादी ढाँचा है, जैसे स्टेडियम, परिवहन और होटल, जो मेज़बानी के लिए अनुकूल है।

अब जर्मनी विश्व कप की मेज़बानी पर विचार क्यों कर रहा है?

DFB के अध्यक्ष बेरंड न्यूएंडॉर्फ ने भविष्य में एक बोली पर विचार करने का सुझाव दिया है, और हेल्मन ने इसे आगे बढ़ाने की बात की है।

क्या जर्मनी की 2038 की बोली में कोई चुनौती है?

हाँ, 2038 की बोली में FIFA के परिसंघ रोटेशन सिद्धांत के कारण चुनौती है, जिसके तहत एक परिसंघ को दो प्रतियोगिताओं का इंतजार करना पड़ता है।

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